Saturday, September 11, 2021

पाठ 6 सदाचार का तावीज(7 वी हिंदी)

 




    श्री हरिशंकर परसाई




    हल्ला = शोर।
नमूना= प्रतिकृति(मॉडल)
भ्रष्टाचार= अनैतिक आचरण।
अंजन= काजल।
विशेषज्ञ= विद्वान,विशेष ज्ञान रखने वाला।
कल= मशीन
विधाता= भगवान।
भुगतान= कर्ज या ऋण चुकाना।
सदाचारी= सत्य आचरण करने वाला , अच्छा व्यवहार।
मंत्री= आदेश या सलाह देने वाला प्रमुख व्यक्ति
आदि = अभ्यस्त।
  विराट= विशाल , बड़ा।
छान–बिन = जांच, पड़ताल
भष्ट = मार्ग से विचलित।
सर्वव्यापी= हर तरफ फैला हुआ।
घुस = रिशवत।
आत्म = जीव।
बेइमानी = छल, कपट।
वेश = पहनावा।
झझट = व्यर्थ की परेशानी।
हुक्म = आज्ञा, आदेश, फरमान।
सूक्ष्म = बहुत छोटा।
सदाचार = व्यवहार।

पाठ परिचय- 

भ्रष्टाचार आज देशव्यापी नहीं ,विश्वव्यापी समस्या बन गई है। हमारे देश के दैनिक समाचार पत्र भ्रष्टाचार के समाचारों से भरे रहते हैं ।सरकार भ्रष्टाचार रोकने के जैसे-जैसे प्रयास कर रही है वैसे-वैसे भ्रष्टाचार फलता- फूलता जा रहा है। भ्रष्टाचार के नए-नए तरीके खोजे जा रहे हैं ।इसी समस्या पर व्यंग्य विधा में ,काल्पनिक कथा के माध्यम से लेखक ने प्रकाश डाला है।

प्रश्नो के उत्तर

प्र1 दरबारियों को भ्रष्टाचार  क्यों दिखाई नहीं पड़ रहा था?
उत्तर- दरबारियों को भ्रष्टाचार इसलिए नही दिखाई दे रहा था क्योंकि दरबारी स्वयं ही  भ्रष्टाचार में लिप्त थे।

प्र2 विशेषज्ञों ने भ्रष्टाचार के बारे में राजा को क्या बताया?
उत्तर- विशेषज्ञों  ने  राजा को बताया कि भ्रष्टाचार हाथ की पकड़ में नहीं आता| वह  स्थूल नहीं सूक्ष्म  है,उसे देखा नहीं जा सकता, अनुभव किया जा सकता है|

प्र 3  भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए विशेषज्ञों ने राजा  को क्या सुझाव दिये?
उत्तर- भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए विशेषज्ञों ने राजा को सुझाव दिया  कि उन्हें  व्यवस्था में बहुत परिवर्तन करने होगे  | एक तो  भ्रष्टाचार  के  मौके मिटाने होगे  | जैसे- ठेका है तो  ठेकेदार  है और  ठेकेदार है तो अधिकारीयों   को घूस है | ठेका  मिट जाये  तो उसकी घूस मिट जाए| आदमी किन  कारणों से आदमी घूस लेता है, यह भी विचारणीय है |

प्र4भ्रष्टचार मिटाने की योजना पढ़ने के बाद राजा  की तबियत क्यों खराब रहने लगी?
उत्तर- भ्रष्टाचार मिटाने की  योजना पढने के  बाद  राजा ने उस पर विचार किया| विचार करते- करते दिन बीतने लगे , रात  की   नींद उड़ा  गई ।जिससे  राजा की  तबियत खराब
रहने लगी।

प्र5 साधु  ने   राजा को भ्रष्टाचार के

बारे में क्या बताया?
उत्तर- साधु  ने राजा को भ्रष्टाचार  के बारे में  बताया कि सदाचार  या भ्रष्टाचार  मनुष्य की आत्मा में होता है बाहर  से नहीं होता| विधाता जब मनुष्य को बनाता है तब किसी की आत्मा में ईमान की मशीन फिट कर देता है और किसी की आत्मा में बेईमान की।इस मशीन में से ईमान या बेईमान के स्वर निकलते है।जिन्हें आत्मा की पुकार कहते है आत्मा की इसी  पुकार के अनुसार ही आदमी काम करता है |

प्र 6 राजा ने  ताबीज के प्रभाव को परखने  के  लिए क्या किया    ?
उत्तर- राजा ताबीज के प्रभाव को परखने के  लिए वेश बदलकर  एक कार्यालय गए  उस दिन दो तारीख थी  | एक  दिन पहले ही तनख्वाह मिली थी| वह एक कर्मचारी  के पास गए और किसी काम के  लिए पाच रुपये का  नोट  देने लगे| कर्मचारी ने उन्हें डाटा और भाग जाने के लिए कहा, यहाँ घूस लेना पाप है| राजा खुश हुए।कुछ दिन बाद वे फिर वेश बदलकर उसी कर्मचारी के पास गए उस दिन 31 तारीख थी राजा ने फिर उसे पांच रुपये का नोट  दिया और उसने लेकर जेब मे रख लिया राजा ने उसका हाथ पकड़कर पूछा क्या तुमने आज सदाचार की तावीज नही पहनी है।

प्र7 राजा ने भ्रष्टाचार की तुलना ईश्वर  से क्यों की?
उत्तर- क्योंकि विशेषज्ञों ने बताया कि भ्रष्टाचार सूक्ष्म  है और  सर्वव्यापी है, परन्तु ये गुण तो ईश्वर में  होते है| इसलिए भ्रष्टाचार की तुलना ईश्वर से की|

पाठ से आगे-
प्र1 पाठ  में  उल्लेख  किया गया है कि " भ्रष्टाचार सर्वत्र हैं सर्वव्यापी है| " आप इस बात से सहमत हैं या असहत तर्क के साथ अपनी समझ को लिखिए|
उत्तर- पाठ के अनुसार' भ्रष्टाचार सर्वत्र हैं' यह बात सस्य है | उदाहरण के लिए, व्यक्ति जन्म से लेकर मत्यु तक इस भ्रष्टाचार रुपी  शिष्टाचार मे जकड़ हुआ है| जन्म लेते हि नगर निगम में भ्रष्टाचार, जन्म- प्रमाण पत्र हेतु, स्कूल में ( एडमिशन) प्रवेश हेतु, युवा  होने पर नौकरी हेतु, नौकरी से सेवानिवृत्त होने पर भविष्य निधि और पेंशन हेतु भ्रष्टाचार ( रिश्वत) को अपनाया जाता है| अन्त  में मृत्युपरान्त मृत्यु प्रमाण- पत्र हेतु भ्रष्टाचार से गुजरना पड़ता है| यहाँ भ्रष्टाचार को आधुनिक शिष्टाचार कहा गया है|

प्र2 क्या आपको लगता है कि ताबीज जैसे साधनो से भ्रष्टाचार खत्म किया जा सकता है? आगर  हा तो कैसे और नहीं तो  क्यों?
उत्तर- ताबीज जैसे साधनों से भ्रष्टाचार खत्म नही किया जा सकता क्योंकि मनुष्य आपनी मन की करता है, वह परेशानियों की वजह से ही भ्रष्टाचार होता है| तबीज जैसे साधन  अधविशवास को बढ़ावा देना है|

प्र3 हमारे देश अथवा राज्य में भ्रष्टाचार फैसलने  के क्या कारण आपकी प्रतीत होते हैं? साथियों से बातचीत कर अपनी समझ को लिखिए|
उत्तर-  हमारे देश में अथवा राज्य में भ्रष्टाचार फैलने का मुख्य कारण आदमीयो की आवश्यकता है क्योंकि आदमी उच्च पद पर बैठकर भी किसी काम को सरलतापूर्वक नहीं करता| कुछ लोग काम को करवाने के लिए रुपयों का प्रलोभन देकर जल्दी ही करवा लेते हैं| आदमी की जल्दबाजी ही भ्रष्टाचार फैलने का कारण है|

भाषा से

प्रश्न 1 निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करने के लिए पाठ के उन अंशों को खोजिए जहां इनके प्रयोग हुआ है और फिर संदर्भ को समझते हुये अर्थ लिखिए-
1. छानबीन करना- जांच, पता लगाना
2. हवाले करना - 2. सौंपना
3.खलल पड़ना - बाधा, रुकावट
4. उलट-फेर- परिवर्तन
5.असमंजस में पड़ना-  निर्णय न ले पाना,उहापोह की स्थिति ,दुविधा की स्थिति

प्रश्न 2 निम्नलिखित वाक्यों को ध्यान से पढ़िए-
* मैं कल दरबार में जाऊंगा
* कल साधु राजा से मिला
* विधाता  किसी की आत्मा की मान में कल फिट कर देता है ।
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द 'कल' के तीन भिन्न अर्थ है उसी प्रकार इन समान उच्चारण वाले शब्दों के अर्थों को वाक्य में प्रयोग करते हुए स्पष्ट कीजिए -
उत्तर- पद- पैर,पदवी।
         आम - फल ,रास्ता
         अंक -भाग,गोद
         सोना-  निद्रा  धातु
         कनक-  सोना धतूरा
        खर- नमकीन ,तेज




















प्रश्न 1सदाचार ताबीज पाठ का लेखक कौन है -
अ.हरिशंकर परसाई
ब.लेखक मंडल
स.भीष्म साहनी
द.संकलित
उत्तर अ.हरिशंकरकर परसाई


प्र.2राजा ने ताबीज को परखने के लिए -
अ.रंग बदला
ब.नगर बदला
स.वेष बदला
द.भाषा बदला
उत्तर स.वेष बदलकर


प्रश्न3 राजा ने खुश होकर साधु के सामने क्या प्रस्ताव रखा
अ.जनरल मैनेजर
ब.संचालक बनने का
स.साहब बनने का
द.मत्री बनने का
उत्तर अ.जनरल मैनेजर


प्र. 4’तुम्हारा क्या मत हैं।’ इस वाक्य में मत का अर्थ है-
अ. नही
ब. समान
स. सलाह
द. विचार
उत्तर द. विचार


प्र.5 मैं कल विद्यालय गया था।’इस वाक्य का कौन -सा शब्द अषद्ध है-
क.विधालय
ख.मैं 
स.कल
द.गया
उत्तर क.विधालय


प्र.6इनमें से कौन सा मुहावरा ’आँख पर है -
अ.नाक- भौ सिकोड़ना
ब.दाँत किटकिटाना
ब.पाँचो ऊँगलियां घी पर होना
द.आँखे ततेरना
उत्तर द.आँखे ततेरना


प्र.7 विषेषज्ञ का बहुवचन होगा -
अ.विशेष
ब विषेषज्ञ
स. विषेष ज्ञान वाला
द. विष्लेष्षो


प्र.8भ्रष्ट्राचार  है?
अ.स्थूल
ब.सुक्ष्म
स.हवा
द.सभी
द.सभी


प्र.9 किसके कान खडे़ हुए-
अ.राहुल के
ब.संदीप के
स.दरबारियों के द.सभी
















स.दरबारियों


प्र.10तावीज से कैसे स्वर निकल रहे थे?
अ.आज तो इकतीस थे। आज लेले
ब.आज तो बत्तीस है। आज मत ले।
स. आज तो एक है। आज लेले
द. कोई नहीं
अ.आज तो इकतीस थे। आज लेले


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