भारती पाठ 3
विद्रोही शक्ति सिंह
शब्दार्थ
जलन = इर्ष्या, द्वेष ,
उन्माद =पागलपन
नादान। = नासमझ
ग्लानि = पछतावा
प्रतिशोध = बदला
अधम। = नीच, पापी।
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👉अभ्यास👈
प्रश्न1. शक्ति सिंह कौन था ? उसने क्या प्रतीज्ञा की थी?
उत्तर:- शक्ति सिंह महाराणा प्रताप का छोटा भाई था । उसने महाराणा प्रताप के प्राण लेने की प्रतिज्ञा की थी।
प्रश्न 2 राजपूत बाला की आंखों से चिंगारिया क्यों निकलने लगी?
उत्तर:- शक्ति सिंह द्वारा मुगल सेना बुलाने और कहने पर राजपूत बाला ने कहा " भाई पर क्रोध करके देशद्रोही बनोगे कहते-कहते उस राजपूत बाला की आंखों से चिंगारिया निकलने लगी।
प्रश्न3. महाराणा प्रताप से शक्ति सिंह की अनबन क्यों हुई?
उत्तर- महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह में शिकार पर अधिकार को लेकर अनबन हुई । जिसको एक साथ दोनो के बाण ने घायल किया था।
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प्रश्न4. शक्ति सिंह का अंतिम निर्णय क्या था ?
उत्तर:- अपनी मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों को न्यौछावर करते राजपूतों को देखकर शक्ति सिंह को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने अंतिम निर्णय लिया की वे अपने भाई का साथ देंगे और दोनो मुगल को मारकर महाराणा के सामने नतमस्तक होकर कहा की आपकी आज्ञा हो तो इन चरणों पर अपना शीश चढ़कर प्रायश्चित कर लू।
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प्रश्न5. मानसिंह की कुमंत्रणा क्या थी?
उत्तर:- मानसिंह अकबर की सेना का प्रधान सेना पति था और मुगल सेना का नेतृत्व कर रहे थे । महाराणा प्रताप को मुगल बादशाह की मैत्रिपूर्ण दस्ता पसंद न थी इसी बात पर महाराणा प्रताप और मनसिह में अनबन हो गई थी फलस्वरूप मानसिंह के भड़काने से अकबर ने स्वयं मानसिंह और सलीम की अध्यक्षता में मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजी।
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प्रश्न6. मन्ना जी ने मेवाड़ का राजचिन्ह अपने मस्तक क्यों धारण किया?
उत्तर:- मन्ना जी ने मेवाड़ का राजचिन्ह अपने मस्तक में इसलिए धारण किया ताकि मुगलों की सेना भ्रमित हो जाए और महाराणा प्रताप युद्ध क्षेत्र से सकुशल निकल जाए।
प्रश्न 7. शक्ति सिंह के आंखे ग्लानि से क्यों छलछला गई ?
उत्तर:- युद्ध क्षेत्र में अपने राजपूत भाईयो के कटे शव , कही कटी हुई भुजाए , कटा धड़ , खून से लथपथ मस्तक भूमि पर पड़े देखकर शक्ति जी की आंखे ग्लानि से छलछला गई और वे सोचने लगे की ये सब भी राजपूत थे । मेरी ही जाती के खून थे ।
प्रश्न8. युद्ध अथवा उस मारकाट के क्या परिणाम हुए?
उत्तर-: युद्ध अथवा उस मारकाट के परिणाम यह हुए की जन्मभूमि के चरणो पर राजपूत वीरों ने अपने प्राणों को उत्सर्ग कर दिया बाइस हजार राजपूत वीरों में से केवल आठ हजार बच गए थे।
भाषा से
प्रश्न1. पत्र में आए गए निम्नलिखित वाक्यों को ध्यान से पड़िए ____
(क) शक्ति सिंह ने एक लंबी सांस फेंकी __और__ अपनी स्त्री की ओर देखा ।
(ख) शक्ति सिंह के हृदय में भाई की ममता उबड़ पड़ी, __फिर__ एक आवाज आई___ रुको।
उपर के उदाहरण (क) में वाक्य "और" (ख) में " फिर" के द्वारा जुड़ते है जिन्हे हम समुच्चय बोधक अव्वय कहते है । दो शब्दो , वाक्त्यांशो अथवा वाक्यों को जोड़ने का कार्य करने वाले अववय समुच्चय बोधक अव्वय कहे जाते है आप समुच्चय बोधक अव्वय के पांच उदाहरण बनाए।
उत्तर 1. मैं पड़ता परंतु पुस्तक नही थी ।
2. यदि तुम परिश्रम करते तो अवश्य ही उत्तीर्ण हो जाते।
3. तनी और नूपुर विद्यालय जाती है ।
4. सोहन कल आया और आज लौट गया।
5. यदि तुम चाहो तो यह काम जरूर कर सकते हो।
प्रश्न2. पाठ में इन शब्दो का प्रयोग को आप देख सकते है __ भूरे बदल, उन्मादपूर्ण हसी, अटल धैर्य ,नया उत्साह , विकट समय , सस्ता जीवन , प्रलय राग ये प्रयोग विशेषण विशेष्य के उदाहरण है । पाठ से आप इसी प्रकार के अन्य उदाहरण को खोजकर लिखिए और विश्ष्य और विशेषण को चिन्हित कीजिए।
उत्तर
विशेषण विशेष्य
लंबी सांस
चतुर सिपाही
सूखे डंठल
काले बादल
दुर्गम मार्ग
डबडबाई आंखे
विकट समय
विषैले बाण
भूरे बादलों।
प्रश्न3. पाठ में बहुत से स्थानों पर योजक चिन्ह (-) का प्रयोग किया या है । पाठ से इन्हे खोजकर लिखिए और योजक चिन्ह(-) का प्रयोग कहा होता है इसे किताब में से ढुंढकर पड़िए और समझिए ।
उत्तर- एक-दूसरे , दिन-भर, कहते-कहते , नस-नस ,
पत्ता-पत्ता , पशु-पक्षी , अपने-अपने , तीतर-बितर, कर-कटकर, फूली-फली, देखते-देखते, उथल-पुथल, धाय-धाय, जीते-जागते , लस्त-पस्त आदि।
जब दोनो पद प्रधान हो तो वह योजक चिन्ह का प्रयोग होता है दोनो पड़ी के बीच में ’और’ का लोप होता है।










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