Saturday, September 11, 2021

पाठ 11 कोई नही पराया (7 वी हिंदी)


पाठ11 कोई नहीं पराया।    
कोई नहीं पराया
-श्री गोपाल दास 'नीरज'



































पाठ परिचय-हम सब ईश्वर की सन्तान हैं। ईश्वर को कुछ
लोग राम कहते हैं। कुछ रहीम, अल्लाह और कुछ गॉड। ईश्वर की सन्तान होने से संसार के सभी लोग भाई-भाई हैं लेकिन स्वय आदमी ने सारी दुनिया को देश, धर्म और जाति के बीच बाँट दिया है। इस बँटवारे ने लोगों के बीच नफरत की दीवारें खड़ी कर दी हैं। दुनिया भर में आये दिन धर्म और जाति के नाम पर दंगे होते रहते हैं, जिनमें हजारों आदमी मारे जाते हैं। कवि इन दीवारों को तोड़ना चाहता है। वह तो सारे संसार को अपना घर मानता है।
उनका आराध्य कोई देवता नहीं, मनुष्य ही है। जैसे-
पहले बगिया की शोभा होती है, डाल की शोभा बाद में, वैसे ही
मनुष्य देश-जाति की शोभा बाद में है,संसार की शोभा पहले है।
काव्य 1
कोई नहीं पराया मेरा घर सारा संसार है।
मैं न बंधा हूं देश काल की जंग लगी जंजीर में,
मैं ना खड़ा हूं जात पात की ऊंची नीची भीड़ में,
मेरा धर्म ना कुछ स्याही शब्दों का सिर्फ गुलाम है,
मैं बस कहता हूं ही प्यारा है तो घर  घर में राम है,
मुझसे तू ना कहो मंदिर मस्जिद पर सर मैं टेक दुँ,
मेरा तो आराध्य आदमी देवालय हर द्वार है  ।
कोई नहीं पराया मेरा घर संसार है।।
  शब्दार्थ- सर टेकना= नतमस्तक होना ।
आराध्या= पूज्य। देवालय= मंदिर। पराया =दूसरा

संदर्भ -प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी भारती के 'भारती' के 'कोई नहीं पराया' नामक पाठ से अवतरित है इसके कवि श्री गोपालदास 'नीरज' जी है
प्रसंग- सच्चे प्यार में ही घर घर में राम के दर्शन होते हैं।                                              व्याख्या- कवि संपूर्ण संपूर्ण संसार को ही अपना घर मानते हुए कहता है कि मेरे लिए कोई भी पराया है मैं अपने पराये की भावना से परे न देश-काल की सीमाओं में बँघा हुआ हूं और ना ही मैं जाती पाती ऊंच-नीच आदि को मानता हूं मेरा धर्म मात्र स्याही और शब्द का गुलाम है मेरा यही कहना है कि जहां सच्चा प्यार है वही घर घर में राम दिखाई देता है इसलिए तुम मुझे किसी मंदिर या मस्जिद में माथा टेकने (झुकाने) के लिए मत कहो मेरा पूज्य( देवता) तो आदमी ही है मेरे लिए हर घर मंदिर है मेरे लिए कोई भी पराया नहीं सब अपने है।क्योंकि मैं संपूर्ण संसार के अपना घर समझता हूं।  
                      पद्यांश 2
कहीं रहे मुझको प्यारा यह इंसान हैं ,
मुझको अपनी मानवता पर बहुत बहुत अभिमान है,
अरे नही देवत्य  मुझे तो भाता है मनुजत्व ही,
और छोड़कर प्यार नहीं, स्वीकार सकल अमरत्व भी,
मुझे सुनाओ  तुम न स्वर्ग सुख की सुकुमार कहानियां
मेरी घरती सौ - सौ स्वर्गो से ज्यादा सुकुमार है।              कोई नहीं पराया,मेरा घर संसार है।।  
                               
शब्दार्थ-अभिमान=गर्व। मनुजत्व = मानवता/ आदमीयत ।  सकल =समस्त।      संपूर्ण, अमरत्व = अमरता, सुकुमार=कोमल 
*संदर्भ* - पुर्ववत्।
*व्याख्या* - कवि कहता है कि कोई नहीं इंसान कहीं और कैसे भी रहता हो यदि उनमें इंसानियत है तो वह हमें प्रिय है मैं अपनी मानवता पर गर्व का अनुभव करता हूं क्योंकि मुझे  देवत्व मनावता ही अच्छी लगती है मुझे इस संसार में प्रेम को छोड़ कुछ भी नहीं यहां तक अमरत्व अमृता भी स्वीकार नहीं है इसलिए मुझे स्वर्ग के सुख की मधुर कहानियां मत सुना प्यार मोहब्बत भाईचारा आदि से युक्त मेरी इस धरती का सुख स्वर्ग सुख से 100 गुना अधिक मधुर एवं सुखदाई है।

पद्यांश 3
मैं सिखलाता हूं की जीओ और जीने दो संसार में ,
जितना ज्यादा बाँट सको तुम बांटो अपने प्यार को ,
इस तरह से तुम्हारे साथ दलित यह धूल भी चलो,
इस तरह कुचल ना जाए पग से कोई फूल भी,
सूख ना तुम्हारा सुख केवल जग का भी इसमें भाग है ,
फूल डाल का पीछे पहले उपवन का सिंगार है ,
कोई नहीं पराया मेरा घर सारा संसार है।।

शब्दार्थ- दलित= दली गई/ कुचली गई।
घुल=रज। उपवन=बगीचा/उघान                   

संदर्भ - पूर्ववत।               
*प्रसंग-* स्वयं के भाग में संसार का सुख भाग निहित होता है।                         
*व्याख्या-* कवि कहता है कि मैं जाऊं और जीने दो की सीख देता हूं आप लोग नफरत को छोड़ जितना हो सके अपने प्यार को बांटे और इस तरह से हंसे की दली गई धूल (रज) भी आप के साथ हंसने लगे (अर्थात जो सदैव सताए गए प्रगति पथ से पिछड़ गए लोग हैं वे भी तुम्हारे बराबर आ जाए तुम्हारे साथ बैठकर हँस बोल सके तुम इस तरह संभल कर चलो की फिर फूल तुम्हारे पैरों तले ना कुचला जाए तुम्हें इस बात का सतत ध्यान रहे कि जिसे तुम मात्र अपना सुख भाग समझ रहे हो उसी में पहले संसार का सुख भाग उसी प्रकार निहित है जिस प्रकार पुष्प उद्यान की शोभा पहले बनाते हैं डाल की शोभा बाद में बनते हैं  ।।
                   
🏁  🏁 *अभ्यास*🏁🏁।                 
पाठ से।           
प्रश्न 1 कवि को मानवता पर क्यों अभिमान है?        
उत्तर- कवि को मानवता पर इसलिए अभिमान है क्योंकि  मुझे देवत्व नहीं मानवता (आदमियत)ही अच्छी लगती है कवि कहते हैं कि कोई भी इंसान कहीं भी  और कैसे भी रहता हो यदि उनमें इंसानियत है तो वह हमें प्रिय है।                    

प्रश्न2 -जात पात की दीवारों में मानवता को क्या हानि पहुंचाई है?                     
उत्तर- जात पात की दीवारों में मानवता को बहुत हानि पहुंचाई है जात-पात की संकीर्ण भावना ने लोगों के बीच नफरत की ऐसी दीवारें खड़ी कर दी है कि आए दिन इस नाम से दंगे होते हैं रहते हैं जिनमें हजारों आदमी मारे जाते हैं कवि इस भावना को समाप्त करना चाहता है।
      
प्रश्न 3 स्वर्ग सुख की सुकुमार कहानियों को कवि क्यों नहीं सुनना चाहता है?
उत्तर- स्वर्ग सुख की सुकुमार कहानियों को कवि इसलिए नहीं सुनना चाहते हैं क्योंकि धरती में सुख को स्वर्ग से भी अधिक सुकुमार कहा जाता है।
         
प्रश्न 4 कवि संसार को क्या सिखाना चाहता है ?  
उत्तर- कवि संसार को मिलजुल कर रहने जाति धर्म से ऊपर मानव धर्म को सर्वोपरि मानने के लिए कहते हैं कवि के अनुसार हम सब ईश्वर की संतान हैं इसलिए भाई भाई हैं आये दिन जाति धर्म और सांप्रदायिकता के नाम पर होने वाले दंगे और नफरत की दीवारों को तोड़ना सिखाना चाहते हैं।
                 
प्रश्न 5 जंग लगी जंजीर किसे कहते हैं?
उत्तर- कवि ने 'जंग लगी जंजीर' अपने पराए से ग्रसित भावना को कहा है और ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि अपने पराए की भावना में फंसा व्यक्ति उसी प्रकार मानवता को नष्ट (खा जाता) करता है जिस प्रकार जंग (मुर्चा )लोहे की जंजीर को खा जाती  है।     
    
प्रश्न 6 धर्म को कवि ने कुछ स्याह शब्दों का गुलाम क्यों कहा है।?                  
उत्तर- धर्म को कवि ने कुछ स्याह शब्दों का गुलाम इसलिए कहा है क्योंकि कवि की यह भावना है कि हम सब ईश्वर की संतान हैं ईश्वर को कुछ लोग राम करते हैं कुछ रहीम, अल्लाह और कुछ गॉड। नाम अलग है लेकिन ईश्वर तो एक है स्वयं आदमी ने सारी दुनिया को देश धर्म और जाति के बीच बांट दिया है कवि ने इसी संदर्भ में कहा है कि "कुछ स्याह शब्दों का का गुलाम" मेरा धर्म इन सबसे ऊपर है मेरा एक ही धर्म है 'मानवता धर्म।'

पाठ से आगे-
प्र 1 कवि 'देवत्व'  और 'अमरत्व' के स्थान पर  'मनुजत्व ' को स्वीकार करता है क्यों ?
उत्तर- कवि 'देवत्व' और 'अमरत्व' के स्थान पर 'मनुजत्व' को इसलिए स्वीकार करता है क्योंकि वह सारे संसार को अपना घर मानता है।वह अपने पराए की संकीर्ण भावना से परे है।वह मानवता का पुजारी है।वह धरती पर प्यार ही प्यार फैलाना चाहता है।

प्र2 कविताएँ सभी जातियो और धर्म में प्यार और सदभाव का संदेश देती है, परन्तु हमारे समाज में ऐसा देखने को क्यों नहीं  मिलता?
साथियों से बात कर अपनी समझ को लिखिए |
उत्तर- हमारे समाज में ऐसा देखने को इसलिए नहीं मिलता क्योंकि वैश्वीकरण ,टेक्नोलॉजी का युग है लोग व्यस्त हो गए हैं प्रत्येक का जीवन धन उपार्जन हो गया है और लोग आस-पड़ोस से दूर हो गए हैं ।पारंपरिक मनोरंजन के साधन घट गए जैसे कहानी ,किस्से आदि इनका स्थान कंप्यूटर और टीवी( टेलीविजन) ने ले लिया है आज समाज में एक दूसरे से प्रेम की स्थान पर स्वार्थ ने जगह बना ली है ।

प्र3  कवि के मनोभावों को  सार्थक करते हुए अगर हर व्यकित संसार कोअपना  घर मानने लगे तो हम जिस समाज में रहते हैं उस समाज की दशा स्थिति  कैसी होगी? चर्चा कर  लिखिए|
उत्तर- कवि के मनोभावों को सार्थक करते हुए अगर हर व्यक्ति संसार को अपना घर मानने लगे तो सारा समाज एक परिवार की तरह होगा उस परिवार में जाति धर्म की भावना नहीं अपितु एकता की भावना बलवती होगी सभी दुख -सुख में एक दूसरे के साथ खड़े होंगे ।

प्र4 कवि  बनावटी  दुनिया को छोड़कर वास्तविक जीवन में मिल- जुलकर रहने पर जोर दे रहा है| यहाँ बनावटी दुनिया और वास्तविक  जीवन से  आप क्या  समझते हैं? लिखिए|
उत्तर :- बनावटी दुनिया आज की चकाचौंध से भरी है जबकि वास्तविक जीवन में सादा जीवन उच्च विचार पर विश्वास करती है बनावटी दुनिया में अंतर खोखला और ऊपर से दिखाने की प्रवृत्ति होती है बनावटी दुनिया स्वार्थ और अहंकार से भरा पड़ा है जबकि वास्तविक जीवन में जिसका जैसा जीवन होता है वह समाज में दिखाई देता है और मिल बांट कर खाने की प्रवृत्ति होती है।

प्र5  आप विचारकर  लिखिए कि   मनुष्य- मनुष्य के  बीच नफरत की दीवार को  कौन  खड़ा  करता है और इस संदर्भ में हमारी क्या भुमिका  होनी चाहिए?
उत्तर- आज मनुष्य- मनुष्य के  बीच जाति धर्म संप्रदायिकता नफरत की दीवारों को खड़ा करता है आज समाज में स्वार्थ की भावना बढ़ गई है समाज में नैतिक मूल्यों का अभाव देखने को मिलता है।
इस संदर्भ में हमारी भूमिका है कि मानवता को सरोवर मानते हुए समाज में मानवता को अपनाना चाहिए सत्य निष्ठा और ईमानदारी से जीवन व्यतीत करना चाहिए भाईचारा और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाकर रखना चाहिए । 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना रखनी चाहिए ।और मनुष्य मनुष्य के बीच बंटवारे विभेद जाति ,लिंग, धर्म , रंग वर्णजनित संकीर्णताओ से ऊपर उठना चाहिए ।

भाषा से-
प्र1  पाठ में आए हुए निम्नलिखित शद्बो को ध्यान से   देखिए - 
मैं, जग, बाँट, जंजीर, हँसना, बधा, ऊँधा   मंदिर, इंसान कहानियों ये शब्द अनुस्वार और चन्द्रबिन्दु के प्रयोग के प्रयोग के कारण अनुनासिक कहे जाते हैं| अनुनासिक स्वर ध्वनि मुख के साथ- साथ नासिक द्वार से निकलती है| अत: अनुनासिक को प्रकट करने के लिए शिरोरेखा के ऊपर बिन्दु या चद्रबिन्दु  का प्रयोग करते हैं| (शब्द या  वर्ण के ऊपर  लगाई जाने वाली रेखा को शिरीरेखा कहते है।)

बिंदु या चद्रबिन्दु को हिन्दी में क्रमश:  अनुस्वार  और अनुनासिक/ चद्रबिन्दु कहा जाता है|
अनुस्वार और अनुनासिक में  अंतर -
★अनुनासिक स्वर है जबकि अनुस्वार मूलतः  व्यंजन।
★अनुनासिक चद्रबिन्दु  को परिवर्तित नहीं किया जा सकता जबकि अनुस्वार को  वर्ण में बदला जा सकता है|

प्रश्न 02 जल,पक्षी, सूर्य,सोना,धरती,शब्द के दो दो पर्यायवाची खोजकर वाक्योमें   प्रयोग कीजिए-
उत्तर -
जल- पानी, वारि 
वाक्य प्रयोग -  जल ही जीवन है |
(2) पक्षी - खग, विहंग
वाक्य प्रयोग- पक्षी आकाश में विचरण करते है|
(3) सूर्य- रवी, भास्कर
वाक्य प्रयोग- सूर्य से  प्रकाश और ऊर्जा प्राप्त होते हैं|
(4)  सोना- कनक, स्वर्ण
वाक्य प्रयोग- रावण की लंका सोने की थी
(5) धरती - धारा, पृथ्वी
वाक्य प्रयोग - धरती वर्षा ऋतु में हरी - भरी  दिखाती है|

सही विकल्प के प्रश्न-

01.कोई नही पराया, मेरा घर सारा संसार है-
अ. डाॅ हरिवंषराय बच्चन
ब. लेखक मंडल
स.गोपाल दास
द. ये सभी
स.गोपाल दास

प्र2 कवि देश काल की किसमें  बंधा है -
क. रस्सी
ब.मजबुरी मे
स.जंग लगी जंजीर
द सभी
उत्तर स.जंग लगी जंजीर

प्र.3कवि कहते है सच्चे प्यार में ही  तो  घर-घर  मे क्या है -
अ.राम
ब.लक्ष्मण
स. भरत
द. ये सभी
उत्तर अ.राम

प्र.4कवि किसके भीड़ मे खड़ा है-
अ. मेले के भीड़ में
ब. जात -पात ऊंच -नीचमें
स. ये दोनो
द. कोई नहीं
उत्तर ब. जात -पात ऊंच -नीचमें

प्र.5 कवि संसार को क्या सिखाता है -
अ.मरने दो
ब. जीवो और जीनो दो
स. सीखो और सीखने दो
द. ये सभी
उत्तर ब. जीवो और जीनो दो

प्र.6 मेरी धरती सुकुमार है -
अ. नरको  से
ब. स्वर्गो से
स.  दोनो से
द. कोई नहीं
उत्तर ब. स्वर्गो से

प्र.7 जीतना ज्यादा बाॅट सको तुम बाॅटो अपने .........को -
अ.दुख
ब. सुख
स.प्यार
द. सभी
उत्तर स.प्यार

प्र.8कवि को अपने मानवता पर क्या है -
अ.अधिकार
ब.अभियान
स.दोनो
द. कोई नही।
उतर अ.अधिकार

प्र.9 कोई नही पराया पाठ क्या है -
अ. कविता
ब.निबंध
स. कहानी
द. कोई नहीं
उत्तर अ

प्र.10 सामाजिक शब्द मे प्रत्यय है -
अ.जिक
ब.इक
स. मिक
द सिक
उत्तर ब

प्र.11 'कनक' का पर्यायवाची शब्द है -
अ. सोना
ब. उठना
स.जगाना
द. भागना
उत्तर अ. सोना

प्र.12 जंजीर शब्द का अर्थ है -
अ. सदन
ब. बंधन
स. वंदन
द. खंदन
उत्तर ब. बंधन

प्र.13 सबल शब्द का विलोम अर्थ है -
अ.मनोबल
ब.निर्बल
स. गुणवान
द. बराबर
उत्तर ब.निर्बल

प्र14.कवि कहते है -
अ.कविता लिखने वाले को
ब. कहानी लिखने वालो को
स.एकांकी लिखने वालो को
द.ये सभी
उत्तर अ.कविता लिखने वाले को

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