Saturday, September 11, 2021

पाठ 09 त्यागमूर्ति ठाकुर प्यारेलाल(7 वी हिंदी)

 

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त्यागमूर्ति ठाकुर प्यारेलाल सिंह



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शब्दार्थ
सुरता       =      याद।
लहूट गया =   वापस आ गया।
नियाव।    =   न्याय।
कड़क।     =  कड़ी ,कठोर।
मालगुजार =  बड़ा किशान।
उखर     =   उनका।
सनद      =  प्रमाण पत्र।
जघा        = जगह , स्थान।
राज        = राज्य।
अगुवाई   = नेतृत्व।
तीर।          =पास।
रइही     = रहेंगे।
घलो     = भी।
तेखरसेती  = जिसके लिए।
एखर    = इसके।

अभ्यास
पाठ से
प्रश्न 1.ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह वकालतल समाजसेवा
(ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने वकालत को समाजसेवा का
के रद्दा बनाइन, कइसे?
उत्तर-ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह वकालत ल समाज सेवा के
रद्दा अइसे बनाइ कि ओमन ह गरीब अउ कमजोर मनखे मन नियाय देवाय बर ओखर डाहर के वकालत करके ओमन ल ओखर हक देवाव। अनियाय के खिलाफ ओमन ह वकालत लड़य।
(ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने वकालत को समाज सेवा का रास्ता ऐसे बनाया कि वे गरीब और कमजोर व्यक्तियों को न्याय दिलाने के लिए उनको तरफ से वकालत करके उन्हें उनका हक दिलाया करते । अन्याय के खिलाफ वे वकालत की लड़ाई लड़ते थे।)

प्रश्न 2. छत्तीसगढ़ राज के निरमान खातिर जुझइया नेता
ठाकुर प्यारेलाल ल काबर कहे गेहे?
उत्तर- छत्तीसगढ़ राज के निर्माण खातिर जुझइया नेता ठाकुर प्यारेलाल को इसलिए कहा गया है क्योंकि वे छत्तीसगढ़ में श्रमिक आंदोलन के सूत्रधार तथा सहकारिता आंदोलन के प्रणेता थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ के बुनकर, मजदूर और किसानों को संगठित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ शोषण विरोधी संघ की स्थापना की।भूदान आंदोलन में ठाकुर प्यारेलाल ने गाँव-गाँव में पैदल यात्रा
की।

प्रश्न 3.ठाकुर प्यारेलाल ह पढ़ाई में बाधा आय के बाद
भी आगु के पढ़ाई कइसे करिस?
उत्तर- ठाकुर प्यारेलाल ने पढ़ाई में बाधा आने के बाद भी
आगे की पढ़ाई जारी रखी। वे बहुत ही गुणवान थे। उन्होंने बी.ए.की परीक्षा पास करके इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सन् 1916 में वकालत की परीक्षा पास की।

प्रश्न 4 ठाकुर प्यारेलाल स्वदेशी भावना ल कहाँ-कहाँ
तक बढ़ाइस अउ ओकर जनता में का-का परभाव परिस?
उत्तर-ठाकुर प्यारेलाल स्वदेशी भावना के लिए अंग्रेजी
शासनकाल में राजनांदगाँव में स्वदेशी आंदोलन में शामिल होकर स्वदेशी आंदोलन की लहर चलाई और राजनांदगाँव के आसपास गाँव में भी राष्ट्रीय चेतना के विस्तार का काम शुरू कर दिया । राजनांदगाँव में ही राष्ट्रीय विद्यालय खोला।खादी के महत्व का प्रचार करने के लिए ठाकुर साहेब खुद चरखा चलाते थे और दूसरों को भी सिखाये। उसका जनता पर यह प्रभाव पड़ा कि 'वंदेमातरम' राष्ट्रीय एकता और चेतना का गीत बन गया। बच्चों से वे टोली बनाकर 'वंदेमातरम्' का नारा लगवाते थे।

प्रश्न 5. भू-दान आंदोलन के का मतलब होथे, अउ
प्यारेलाल के भू-दान आंदोलन म का योगदान रहिस? लिखव।
उत्तर-भूमिहीन, खेतिहर मजदूर ल भू-स्वामी बनाय के परन के संग आचार्य विनोबा भावे के भू-दान क्रांति के ठाकुर साहेब सिपाही बनगे। ओमन जे गाँव म जाँवय उहाँ माल गुजार अउ बड़े किसान मन अपन जमीन के हिस्सा दान कर देवय । इही भू-दान के 2200 मील के लम्बा यात्रा म जबलपुर के तीर म ठाकुर प्यारेलाल सिंह शहीद होगे।
(भूमिहीन, खेतिहर मजदूरों को भू-स्वामी बनाने का प्रण
(प्रतिज्ञा) के साथ आचार्य विनोबा भावे के भू-दान क्रांति के ठाकुर साहब सिपाही बन गए। वे जिस गाँव में जाते वहाँ के मालगुजार और बड़े किसान अपनी जमीन का हिस्सा दान कर देते। इसी भू-दान के 2200 मील को लम्बी पदयात्रा में वे जबलपुर के पास शहीद हो गए अर्थात् पदयात्रा के दौरान उनका आकस्मिक निधन हो गया।)

प्रश्न 6. शिक्षा के क्षेत्र म ठाकुर साहेब के का योगदान
रिहिस?
(शिक्षा के क्षेत्र में ठाकुर साहब का क्या योगदान रहा?)
उत्तर-ठाकुर साहेब ह राजनांदगाँव म राष्ट्रीय विद्यालय
खोलिन। डॉ. खरे के मंत्रीमण्डल म शिक्षामंत्री बने के बाद ओमन ह प्रदेश म शिक्षा के विकास अउ विस्तार बर बहुत अकन योजना बनाइन । वोमन ह छत्तीसगढ़ एजुकेशन सोसायटी के स्थापना करिन, जेन ह छत्तीसगढ़ महाविद्यालय शुरू करिस।
(ठाकुर साहब ने राजनांदगाँव में राष्ट्रीय विद्यालय प्रारंभ किया।डॉ. खरे के मंत्रीमण्डल में शिक्षामंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रदेश में शिक्षा के विकास एवं विस्तार के अनेक योजना बनायी। उन्होंने छत्तीसगढ़ एजुकेशन सोसायटी की स्थापना की, जिसके द्वारा छत्तीसगढ़ महाविद्यालय की शुरुआत की गई।)

पाठ से आगे
प्रश्न 1. खिलाड़ी भावना के का अर्थ होथे अउ वोकर
अपन जीवन में कइसे प्रयोग करे जा सकथे?
(कक्षा में समूह में चर्चा करके लिखव।)
उत्तर-खिलाड़ी भावना का यह अर्थ होता है कि खेल के
मैदान में जी जान से लगे रहना चाहिए। जीवन में इसका प्रयोग करने से सफलता निश्चित ही प्राप्त होती है। हमें जी जान से लगे रहकर कोई भी कार्य को करना चाहिए। जीवन में भी खेल की तरह ही नियम पूर्वक जीना चाहिए। अनुशासन बनाए रखना चाहिए। जीवन को भी खेल-खेल में बिना किसी से पक्षपात किए बिना जीना चाहिए।

प्रश्न 2. ठाकुर प्यारेलाल जइसन छत्तीसगढ़ के कोन-
कोन नेता रहिन वोकर आजादी में का-का योगदान रहिस
शिक्षक अउ साथी से जानकारी प्राप्त करव।
उत्तर-ठाकुर प्यारेलाल जइसन छत्तीसगढ़ में पं. सुंदरलाल
शर्मा, शहीद वीरनारायण सिंह, डॉ. खूबचंद बघेल, पं. रविशंकर शुक्ल, बैरिस्टर छेदीलाल, पं. रत्नाकर झा, नारायण राव मेघावाले, डॉ. वामनराव लाखे, सेठ शिवदास डागा आदि सोनाखान के जमींदार वीरनारायण सिंह ने सन् 1857 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह का एलान कर सैन्य दल बनाया और अंग्रेजी हुकूमत पर हमला बोल दिया और लोगों में क्रांति की लहर जगाई। डॉ. खूबचंद बघेल छात्र जीवन से ही देश सेवा के कार्य में जुड़े रहे। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़ गाँव-गाँव घूमकर आंदोलन
का प्रचार-प्रसार किया। पं. सुंदरलाल शर्मा छत्तीसगढ़ में सामाजिक संचेतना के संवाहक थे। उन्होंने सन् 1920 में कंडेल ग्राम में नहर सत्याग्रह आंदोलन किया। स्वदेशी प्रचार के लिए उन्होंने अपने गाँव बेच दिए और राजनैतिक अन्याय का विरोध कर स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए भरसक प्रयास किया।

प्रश्न 3. ठाकुर साहब जनसेवा के अब्बड़ काम करिन।
जनसेवा के का मतलब होथे। तु मन ल जनसेवा के मौका
मिलहीं त का-का करहु । सँगवारी मन सन बात कर लिखव।
उत्तर- ठाकुर सहाब जनसेवा के अब्बड़ काम करिन ।
जनसेवा का मतलब है-दूसरों की भलाई के लिए कार्य करना समाज सेवा करना, अपने जीवन को दूसरों के लिए समर्पित करना। हमें जनसेवा का मौका मिलेगा तो हम भी दूसरों के लिए काम करेंगे। हमारे आस-पास ऐसे लोग हैं जो निःशुल्क स्वास्थ्य केन्द्र, धर्मशालाएँ चलाते हैं। बहुत सारी संस्थाएँ भी हैं जो जनसेवा के कार्य करती हैं हम उनसे जुड़कर भी जनसेवा कर सकते हैं। देश में कोई बड़ा संकट जैसे आतंकवाद, प्राकृतिक आपदा आए तो सबको मिल-जुलकर एक साथ स्वेच्छा से धन और श्रम का
योगदान देना चाहिए। हमें धर्म और जाति से ऊपर उठकर मानवता के लिए कार्य करना है। सभी से सहयोगात्मक व्यवहार करना चाहिए। सर्वप्रथम हम देश के नागरिक हैं इसलिए हमें मिल जुलकर रहना चाहिए।

प्रश्न 4.छत्तीसगढ़ में असहयोग आंदोलन में भाग लेवइया
अउ आंदोलनकारी मन के नाम ल खोज के लिखव।
उत्तर-ठाकुर प्यारेलाल जइसन छत्तीसगढ़ में पं. सुंदरलाल
शर्मा, शहीद वीरनारायण सिंह, डॉ. खूबचंद बघेल, पं. रविशंकर शुक्ल, बैरिस्टर छेदीलाल, पं. रत्नाकर झा, नारायण राव मेघावाले, डॉ. वामनराव लाखे, सेठ शिवदास डागा आदि सोनाखान के जमींदार वीरनारायण सिंह ।

भाषा से

प्रश्न 1. पाठ म 'जुझइया' शब्द पर धियान देवव, ये 'शब्द'
जूझना क्रिया म इया प्रत्यय के जोड़ ले बनिस 'जुझइया'।
    तु मन पाँच क्रिया शब्द म 'इया' प्रत्यय लगाके नवां शब्द
बनावव अउ अपन वाक्य में प्रयोग करव।
उत्तर-पढ़इया, जवइया, चलइया, खवइया, करइया, भरइया, धोवइया, आदि ।
(वाक्य प्रयोग छात्र स्वयं करे।)

प्रश्न 2. पाठ म तीर-तखार सब्द आय हावे। तीर सब्द ह
सार्थक सब्द आय। एकर अर्थ हे 'नजदीक' या पास फेर तीर तखार शब्द के कोनो अर्थ नई निकले । दुनो सब्द के संघरा प्रयोग करे ले सब्द-युग्म बन जाथे। अउ एकर अर्थ निकलथे आस-पास। अइसने ढंग के युग्म शब्द हे चाय-वाय। सब्द युग्म के पाँच सब्द सोच के लिखव अउ ओला अपन वाक्य म प्रयोग करव।
उत्तर-लड्डू-वड्डू, साग-वाग, पानी-वानी, मीठा-वीठा,
खाना-वाना, कपड़ा-लत्ता, नत्ता-गोता आदि।
(वाक्य प्रयोग छात्र स्वयं करें।)

प्रश्न 3. खाल्हे खिलाय सब्द मन के उल्टा अर्थ वाला
सब्द लिखव-
उत्तर-सुरता-भूलना,
कड़क-कोमल,नरम,
निरमान-तोड़ना,
दुरलभ-सुलभ,
स्वदेशी-विदेशी,
पहिली-आखिरी,
तीर-तखार।

योग्यता विस्तार
1. छत्तीसगढ़ के अउ स्वतंत्रता सेनानी मन (पं. माधवराव
सप्रे, पं. राम दयाल तिवारी ) के जीवनी खोज के पढ़व।
उत्तर-शिक्षक की सहायता से छात्र खोजकर पढ़ें।

2. स्वतंत्रता सेनानी मन के जीवन से हमन ला का प्रेरणा
मिलथे? संगवारी मन सन बात कर लिखव।
उत्तर- 1. स्वतंत्रता सेनानी के जीवन से यह प्रेरणा मिलती
है कि देश के लिए ही जीओ और देश के लिए ही मरो।
2. त्याग और समर्पण की भावना प्रत्येक मनुष्य में होना
चाहिए।
3. देश में संकट आने पर एकता से सामना करें।
4. स्वान्तः सुखाय नहीं सर्वे भवन्तु सुखिनः या वासुदेव
कुटुम्बकम् की भावना होनी चाहिए।
5. अपने जीवन से पहले देश के प्रति आदर बड़ा है।




















सही विकल्प के महत्वपूर्ण प्रश्न

1.भू -दान क्रांति में ठाकुर प्यारेलाल सिंह काखर सहयोग ले सिपाही बनिस-
अ.आचार्य रजनीश्
ब.आचार्य रामकृष्ण
स.विद्यासागर
द.विनोबा भावे
द.विनोबा भावे

2 ठाकुर प्यारेलाल सिंह कहाँ के नगर पालिका अध्यक्ष बने रहिस-
अ.जबलपुर
ब.रायपुर
स.कबीरधाम
द.राजनांदगांव
अ.जबलपुर

3 ठाकुर प्यारे लाल कहाँ षहीद होईस-
अ.जबलपुर
ब.रायपुर
स.कबीरधाम
द.राजनांदगांव
उत्तर द.राजनांदगांव

4 रायपुर के गांधी चैक में ठाकुर प्यारेलाल के कड़क भाषण दे के का परिणाम होईस -
अ. बंदी बना लिया
ब. उँकर सारी सगंीं ल बंदी बना लिस
स. भीड़ तीतर वितर हो गया।
द.सभी
उत्तर-अ. बंदी बना लियास. अंग्रेज मन अपन साथ मिला

5असहयोग आंदोलन कब शुरू होईस
अ.1920
ब.1930
स.1930
द.1940
उत्तर अ.1920

6 सुरता का मायने होगा
अ.याद
ब.न्याय
स.कोई
द.सभी
उत्तर अ.याद

7लहुट के मायने होगा-
अ.नेतृत्व
ब.वापस
स.कोई नहीं
द.सभी
उत्तरब.वापस

8नियाव के मायने  होगा
अ.न्याय
ब. आस -पास
स.कोई नहीं
द.सभी
उत्तर अ.न्याय

9कड़क के मायने होगा
अ.कठोर
ब.गलत
स.सभी
द.केाई नहीं
उत्तरअ.कठोर

10 मालगुजार के मायने होगा
अ.लगातार
ब.बड़ा किसान
स. गरीब
द.कोई नहीं
उत्तर ब.बड़ा किसान

प्र.11 उकर के मायने होगा
अ.उनका
ब.सही
स.रहेंगें
द.सभी
उत्तरअ.उनका

12.प्रतीक्षा के क्षेत्र में ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह कौन महाविद्यालय के शुरूआत करिस-
अ. कृषि महाविद्यालय
ब. चिकित्सा महाविद्यालय
स. बस्तर महाविद्यालय
द. छत्तीसगढ़ महाविद्यालय
उत्तर द. छत्तीसगढ़ महाविद्यालय

13जुलाई1945 के दिन ठाकुर साहेब का नींव रखिस-
अ.बी.एन.सी.मिल के
ब.छत्तीसगढ़ महाविद्यालय के
स. छत्तीसगढ बुनकर सहकारी संघ के
द. छत्तीगढ़ एजुकेशन सोसायटी के
उत्तर स. छत्तीसगढ बुनकर सहकारी संघ के

14ठाकुर साहेब के माॅ के नाॅव रहिस-
अ. गोमती देवी
ब. नरमदा देवी
स. गंगा देवी
द. पारवती देवी
उत्तरब. नरमदा देवी

15ठाकुर प्यारेलाल सिंह के जन्म होइस-
अ.दइहान म
ब.तीसबहारी म
स.इलाहाबाद म
द.रायपुर म
उत्तर अ.दइहान म

16 ठाकुर प्यारेलाल का जन्म-
अ. 21दिसंबर 1891
ब. 21 जून 1790
स. 25जुलाई 1986
द.कोई नहीं
त्तरअ. 21दिसंबर 1891

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